Thursday, 14 December 2017

मुझे धर्म में मत बाटों...

मुझे धर्म में मत बाटों

मुझे दीवाली पे मिठाई... होली में गुझिया खाने दो... 
ईद पर सेवईयां खाने दो... 
गुरुपुरब पर हलवा खाने दो... 
क्रिसमस पे केक खाने दो... 

भैया... मुझे धर्म में मत बाटों...

- रोमिल

फिर यह मेरी फ़िक्र का दिखावा क्यों?

अगर तुम मेरी जन्मदिन पर 
कूड़े के ढ़ेर से एक कागज़ उठा कर 
उस पर मुबारकबाद के दो शब्द ही लिख देते 
तो मेरे लिए यह तोहफ़ा बेशकीमती होता...
पर तुमसे यह भी न हो सका... 

फिर यह मेरी फ़िक्र का दिखावा क्यों?

- राज

तुम्हारी आदत

यह जो तुम्हारी आदत है न किताब पढ़ के भूल जाने की... 
इसे इंसानो पे मत आजमाया करो तो अच्छा होगा.. 
वरना किसी दराज़ की अकेली क़िताब बन के रह जाओगी...  

वैसे यह आवारागर्दी की आदत जो तुमने पाल रखी है... 
यह खुश रहने की तरक़ीब है 
या फिर 
ग़म को भूला देने का नया सलीक़ा है कोई... 

- सन

शक्कर ढ़ोने वाले बैल को भी खाने में भूसा ही मिलता है...

शक्कर ढ़ोने वाले बैल को भी खाने में भूसा ही मिलता है...

टीपू को गद्दी के लिए बग़ावत करनी पड़ी थी... और युवराज को ख़ुशी-ख़ुशी सिंहासन मिल गया...

टीपू को गद्दी के लिए बग़ावत करनी पड़ी थी... और युवराज को ख़ुशी-ख़ुशी सिंहासन मिल गया...

यही फ़र्क होता है 
माँ और बाप में... 

माँ ख़ुशी-ख़ुशी सब कुछ अपने बच्चों को दे देती है... 
और बाप से हक़ भी छीनना पड़ता है... 

- सन

बेटा...हर दिन तालीम हासिल करो... खूब तालीम हासिल करो...

अम्मी कहती थी... 

ज़मीन-ज़ायदाद का हक़ अब्बा देता है... 
जब अब्बा ही अपना नहीं हुआ... 
तो बेटा... कैसी ज़मीन, कैसी जायदाद, कैसा हक़... 

बेटा... यह लड़ाई-झगड़ा... यह बेहस-बाज़ी... 
यह मोहल्ला में जाकर हंगामा करना... 
यह बुजुर्गों को बैठाकर सुलह-मशवरे करना... 
मैं पढ़ी-लिखी थी... इसलिए मुझसे यह सब नहीं हुआ... 
 
बात दौलत की नहीं... 
अगर मुहब्बत या हौसला-अफ़ज़ाई के दो बोल मिल जाते तो काफी होते... 
यह भी मेरे अपने-मेरी रिश्तेदारों से नहीं हुआ...  

भूखे रहना मंज़ूर है.. 
मगर तुम्हारे अब्बा से कुछ मांगना मेरी तौहीन होगी... 
किसी भी औरत को कभी ज़िल्लत से ज़िन्दगी नहीं जीनी चाहिए... 

बेटा...हर दिन तालीम हासिल करो... खूब तालीम हासिल करो... 
इससे बड़ी कोई दौलत नहीं होगी... 

- सन

Reactions... SMS

1st Reaction...