Saturday, 18 April 2015

इससे ज्यादा और क्या रोज़ेदारी होगी

इससे ज्यादा और क्या रोज़ेदारी होगी रोमिल 

उसका नाम जो सुबह-शाम लिया करते हो!
***
उसको पाने की खवाइश में भीग जाता हूँ रोमिल
मेरी शहर की बरसात ही कुछ ऐसी है
जब बरसती है
उसका चेहरा बना जाती है!
***
यह कैसा परिंदा निकला मेरा दिल रोमिल
पानी - पानी भी चिल्लाता रहा
मगर तेरे दर का पानी भी न पिया!

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