Tuesday, 29 September 2015

सामने है माँ की तस्वीर सोचता हूँ क्या बात करूँ?

सामने है माँ की तस्वीर
सोचता हूँ क्या बात करूँ?

तकरार करूँ
या फिर
आंसूओं की बरसात करूँ..
देर तक निहारता रहूँ
या फिर
सीने से लगाकर बाहों में गिरफ्तार करूँ.

फूलों से श्रृंगार करूँ
या फिर
दीप-ज्योति प्रज्जावलित करूँ.

सर झुकाए खड़ा रहूँ
या फिर
ढेर सारी बातें करूँ.
सामने है माँ की तस्वीर
सोचता हूँ क्या बात करूँ?
- सनी

No comments:

Post a Comment