Tuesday, 12 January 2016

उफ़ उसकी बेरुखी ने इस कदर मेरे दिल में सन्नाटा फैला दिया

उफ़ उसकी बेरुखी ने इस कदर मेरे दिल में सन्नाटा फैला दिया 
वोह पास से गुज़ारा एक आहट न सुनाई दिया...

क़दमों में बांध रखी थी उसने आंसू की ज़ंजीर
मुझको कभी आंसू के समुंदर में उतरने न दिया...

औरों के डर से उसने कर लिया मुझसे किनारा
दुनिया में मुझे बदनाम होने न दिया...

उसे बेवफा कहूँ तोह कैसे कहूँ
रूह-ए-मोहब्बत में उनसे मुझे पाक कर दिया...

- Sun

No comments:

Post a Comment