Wednesday, 27 January 2016

Indra

जब हम बात इंद्र की करते है तो, इंद्र जिसके पास स्वर्ग है, जो भोग-विलास में डूबा हुआ है, अप्सरा का नृत्य देखता हुआ, जो लीडर है, जिसके पास कामधेनू जैसी गाय, चिंतामणि जैसी मणि, एरावत जैसा वाहन, कल्पतरु जैसा वृक्ष... यानि की सब वैभव है... धन सम्पदा है, समृद्धि है...

परन्तु सुख नहीं है, हमेशा जो डर से घिरा रहता है... कभी दानव, तो कभी राक्षस, उससे उसका स्वर्ग, राज-पाठ छीन लेते है... फिर वह भाग कर ब्रह्मा जी के पास जाता है... ब्रह्मा जी उसे विष्णु, शिव या फिर आदिशक्ति के पास भेजते है... फिर युद्ध होता है, फिर दानव, राक्षस हारते है, फिर स्वर्ग इंद्र को वापस मिल जाता है... यह चक्र चलता रहता है...

अब हमको इन सब से क्या ज्ञान मिलता है... वैभव, धन-सम्पदा, समृद्धि है... परन्तु असली सुख आत्मा का सुख, आत्मज्ञान नहीं है... जरुरी क्या है हमको आत्मज्ञान प्राप्त करना चाहिए, जो सभी सुखों  से ऊपर है...

No comments:

Post a Comment