Thursday, 28 January 2016

Baikunth

बैकुंठ धाम - अब लोग स्वर्ग की इच्छा नहीं करते है... करते है तो बैकुंठ की इच्छा... यानि विष्णु धाम...

बड़ा ही रोचक है यह देखना कि कोई सागर के बीच शेषनाग पर लेटा हुआ है... सांपो के बिस्तर पर लेता है.... और फिर भी उसके होठों पे मुस्कान है....

अगर इसको इस तरह से देखे कि सागर यानि की यह संसार... शेषनाग यानि की दुःख, कष्ट, भय.... उसे डरा रहे है... फिर भी वह सुखी-आनंद महसूस कर रहा है... लक्ष्मी जिसके चरण-कमल के पास बैठी है... साथ में सरस्वती है.... फिर भी वह संतोष की निद्रा में है....

असल में यही है बैकुंठ धाम... जो संसार में होते हुए भी, दुःख, कष्ट, भय से न डरे, जिसे धन का लोभ न हो, धन जिसके कदमो में रहे... वह आत्मा ज्ञान की निद्रा में हो...

No comments:

Post a Comment