Monday, 1 February 2016

अदभुत, अविश्वसनीय, अकाल्पनिक... नाज़

अदभुत, अविश्वसनीय, अकाल्पनिक... आज तक चैनल पर कल का शो ३१.०१.२०१६ बड़ा ही जरूरी था मेरे लिए.... प्रोफेसर नंदनी सिन्हा कपूर, नई दिल्ली की स्टोरी मेरी लाइफ की स्टोरी से मिलती-जुलती थी.... उन्होंने अपने स्वर्गीय पति के सबूत इकट्ठा किये... पर मैंने कभी नाज़ के सबूत इकट्ठा नहीं किये थे.... 
 
प्रोफेसर  नंदनी का यह वाक्य अगर आप परमात्मा पर विश्वास करते है और आत्मा पर नहीं करते तो उचित नहीं होगा....
 
जब तक इंसान का वक़्त या कोई विशेष उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता वह इस दुनिया से नहीं जा सकता.... और ऐसा ही कुछ मेरा भी नाज़ के साथ था.... तब वह भी मुझे सुनाई देती थी, संकेत देती थी...
 
मानो या फिर न मानो। 
 
मगर  मन से सुन्दर रहो । 

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