Sunday, 28 February 2016

खुला पड़ा हुआ है मेरा दिल-ए-समुन्दर, किताब की सूरत में

ab rehne aur sunne ko bacha hi kya hai
na koi tumse shikwa, na koi shikayat hai
khula pada hua hai mera dil-e-samundar... kitab ki surat mein
aur tum ab bhi puchati ho yeh chup rehne... yeh udasi ki wajah kya hai...

- Sun

अब रहने और सुनने को बचा ही क्या है
न कोई तुमसे शिक़वा, न कोई शिकायत है
खुला पड़ा हुआ है मेरा दिल-ए-समुन्दर किताब की सूरत में
और तुम अब भी मुझसे पूछती हो यह चुप रहने, यह उदासी की वज़ह क्या है.... 

- सन 

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